आपके शुभ कामों का फल पाने से रोकती है बिंदी, पूजा के दौरान ना करें इस्तेमाल

1. त्रिनेत्र का प्रतीक बिंदी

बिंदी को त्रिनेत्र का प्रतीक और स्त्रियों के लिए सौभाग्यशाली माना गया है। यह जहां महिलाओं के श्रृंगार का महत्वपूर्ण हिस्सा है, वहीं उनकी स्त्री शक्ति का भी प्रताक है। इसलिए अक्सर परंपरागत त्यौहारों या पूजा-पाठ जैसे धार्मिक कार्यों के दौरान भी स्त्रियां बिंदी लगाया करती हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि इस तरह आपको पूजा का फल नहीं मिल पाता?

2. सौभाग्य से जुड़ा

आपको यह जानकर हैरानी जरूर होगी कि अगर बिंदी स्त्रियों की सौभाग्य वृद्धि करता है तो यह आखिर उनके पूजा फलों को नष्ट कैसे कर सकता है! इसके पीछे के कारण जानना दिलचस्प है…

3. आज्ञा चक्र और बिंदी

बिंदी भौंहों के बीच लगाई जाती है। योग में यह स्थान आज्ञा चक्र के अंतर्गत आता है और शरीर का सबसे महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है। यहां शरीर की तीन सबसे प्रमुख नाड़ियां (इड़ा, पिंगला और सुषुम्ना) आकर मिलती हैं, इसलिए इसे संगम भी कहते हैं। आपके ध्यान केंद्रण और आध्यात्मिक सोच के लिए यही चक्र जिम्मेदार होता है।

4. योग विज्ञान

योग विज्ञान के अनुसार यह शरीर का वह महत्वपूर्ण स्थान है जहां अदृश्य ब्रह्म ग्रंथि या ब्रह्म रंध्र होते हैं जो आज्ञा चक्र ही है। यही वह जगह है जिससे आप ध्यान लगाते हैं। वास्तव में ये नाड़ियां आपकी सिक्स सेंस या छठी इंद्रीयों से जुड़ी होती हैं जो आपको ब्रह्मांड से जोड़ती हैं।

5. योग विज्ञान

इस चक्र के अवरुद्ध होने से आप ब्रह्मांडीय शक्तियों या कहें ब्र्ह्मांडीय ऊर्जाओं से जुड़ नहीं पाते हैं जबकि यही वह चीज है जो आपको सामान्य जीवन से अलग अलौकिक शक्ति की अनुभूति देता है। वास्तव में वह ऊर्जा ही आपके मस्तिष्क को अदृश्य या भविष्य में होने वाली चीजों से जोड़ता है जो आपको चमत्कारिक लगता है। वह वास्तव में ब्रह्मांडीय ऊर्जा ही है।

6. पूजा के दौरान आज्ञा चक्र

पूजा के दौरान आपका आज्ञा चक्र जाग्रत होता है, इसलिए इस ऊर्जा से जुड़ने के कारण आपकी मस्तिष्क शक्ति कई गुणा बढ़ जाती है और आप असंभव या मुश्किल दिखने वाले कार्य भी कर पाते हैं। इसे ही आप भगवान से जुड़ना मान सकते हैं।

7. बिंदी का अवरोध

बिंदी के लगे होने पर आपका आज्ञा चक्र अवरुद्ध हो जाता है। इस तरह आप जब पूजा के दौरान ध्यान में होती हैं तो आपका ब्रह्मांडीय ऊर्जा से जुड़ाव नहीं हो पाता। इस प्रकार पूजा करने से जो अलौकिक ऊर्जा व्यक्ति को मिलती है और जिस आध्यात्मिकता का विकास होता है वह आपमें नहीं हो पाता। इस प्रकार पूजा का फल आपको नहीं मिल पाता।

8. पूजा के दौरान बिंदी ना लगाना

इसलिए कोशिश करें कि पूजा के दौरान बिंदी ना लगाएं। त्यौहारों के दौरान या पूजा की तैयारी में आप भले ही इसे लगा लें लेकिन पूजा या ध्यान में बैठने के दौरान इसे निकाल दें। बाद में फिर चाहें लगा ही क्यों ना लें।

9. पुराने जमाने की स्त्रियां

अब आप कह सकते हैं कि अगर बिंदी लगाना पूजा की फल प्राप्ति में बाधा है तो आखिर करवा चौथ जैसे सुहागनों के व्रत में पूजा के लिए आवश्यक सोलह शृंगार में इसे क्यों रखा गया है? इसके पीछे का कारण बिंदी के स्वरूप से जुड़ा है जो पहले से अब बहुत बदल गया है।

10. पुराने जमाने की स्त्रियां

पुरातन काल में सुहागन स्त्रियों के लिए कुमकुम की बिंदी लगाने का चलन था। पूजा आदि के कार्यों में महिला-पुरुष दोनों ही चंदन, हल्दी, केसर का टीका या माथे पर भभूत (पूजा का राख) लगाया करते थे। आपने देखा होगा कि सभी प्रकार के शृंगारों से दूर रहने वाली साध्वियां भी भौहों के बीच चंदन का टीका अवश्य लगाती हैं।

11. पुराने जमाने की स्त्रियां

चंदन का टीका मस्तिष्क के आज्ञा चक्र को शांत करता है, इस प्रकार आपमें ब्रह्मांडीय ऊर्जा ग्रहण करने की शक्ति भी बढ़ती है। इसके अलावा टीका कोई भी लगाया जाए, चूर्ण या द्रवीय रूप में होने के कारण वह भी आपकी ब्रह्म ग्रंथि या आज्ञा चक्र को अवरुद्ध नहीं करता।

12. पुराने जमाने की स्त्रियां

लेकिन पुरातन काल की टीका लगाने या कुमकुम बिंदी लगाने का रिवाज धीरे-धीरे स्टिकर बिंदी के रूप में प्रचलित हो गया जो आज भी इस्तेमाल किया जाता है। स्टिकर बिंदी प्रकाश के मार्ग को अवरुद्ध करता है। इस प्रकार आपकी ब्रह्म ग्रंथि ब्र्ह्मांडीय ऊर्जा से नहीं मिल पाती और पूजा के फल आपको नहीं मिल पाते।

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